जनता के पैसे पर एक नागरिक का सवाल
यह दृश्य भारत के लगभग हर शहर और कस्बे में देखने को मिलता है।
नई सड़क बनती है।
लोग खुश होते हैं।
यातायात सुचारू हो जाता है।
सड़क चमकती हुई दिखाई देती है।
लेकिन कुछ ही दिनों या महीनों बाद मशीनें आ जाती हैं।
सड़क फिर से खोदी जाती है।
कहीं पानी की पाइपलाइन डालनी है।
कहीं ड्रेनेज का काम बाकी है।
कहीं केबल बिछानी है।
कहीं किसी विभाग का अधूरा काम पूरा करना है।
फिर सड़क की मरम्मत होती है।
बारिश आती है।
मरम्मत की गई जगह धंसने लगती है।
गड्ढे बन जाते हैं।
वाहन खराब होने लगते हैं।
लोग दुर्घटनाओं का शिकार होते हैं।
और फिर जनता का पैसा दोबारा खर्च किया जाता है।
सवाल बहुत सीधा है।
जब सड़क बनाई जा रही थी, तब पूरी योजना पहले क्यों नहीं बनाई गई?
सरकार जो भी पैसा खर्च करती है, वह आखिरकार जनता का पैसा है।
मजदूरों के पसीने से आया हुआ पैसा।
किसानों की मेहनत से आया हुआ पैसा।
व्यापारियों और उद्यमियों की कमाई से आया हुआ पैसा।
नौकरीपेशा लोगों द्वारा दिए गए टैक्स का पैसा।
यह किसी का मुफ्त का पैसा नहीं है।
यह जनता की कमाई है।
जब एक ही सड़क को बार-बार खोदा जाता है, तो नुकसान सिर्फ सरकारी खजाने का नहीं होता।
एक मोटरसाइकिल चालक गड्ढे में गिर सकता है।
एक परिवार को अपने वाहन की मरम्मत पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ता है।
एम्बुलेंस ट्रैफिक में फंसकर कीमती समय गंवा सकती है।
दुकानदारों का व्यापार प्रभावित हो सकता है।
बच्चों को असुरक्षित रास्तों से स्कूल जाना पड़ सकता है।
दैनिक मजदूरी करने वाले लोगों की आय प्रभावित हो सकती है।
यह नुकसान केवल पैसों का नहीं है।
यह समय, सुरक्षा, सुविधा और कभी-कभी जीवन का भी नुकसान है।
भारत ने चंद्रमा तक पहुंचने का इतिहास बनाया है।
हमने बड़े-बड़े राजमार्ग, पुल, मेट्रो और हवाई अड्डे बनाए हैं।
तो क्या हम अपने शहरों और गांवों में बेहतर योजना बनाकर सड़कें नहीं बना सकते?
एक विभाग सड़क बनाए और दूसरा विभाग कुछ दिनों बाद उसे खोद दे — क्या यह सही व्यवस्था है?
जनता एक ही सड़क के लिए बार-बार भुगतान क्यों करे?
काम शुरू होने से पहले सभी विभाग मिलकर योजना क्यों नहीं बनाते?
पानी, ड्रेनेज, बिजली और संचार सुविधाएं आवश्यक हैं।
लेकिन योजना भी उतनी ही आवश्यक है।
अच्छा शासन बार-बार मरम्मत करने से नहीं दिखता।
अच्छा शासन ऐसी व्यवस्था से दिखता है जो लंबे समय तक टिके।
UBDP मानता है कि हर नागरिक को यह पूछने का अधिकार है:
इस परियोजना को किसने मंजूरी दी?
क्या भविष्य की जरूरतों का ध्यान रखा गया था?
सड़क की मरम्मत की जिम्मेदारी किसकी है?
गुणवत्ता के मानकों का पालन हुआ या नहीं?
जनता के पैसे की सुरक्षा कैसे की जा रही है?
ये राजनीतिक सवाल नहीं हैं।
ये करदाता के सवाल हैं।
भारत को ऐसी सड़कें चाहिए जो सोच-समझकर बनाई जाएं, मजबूत हों और लंबे समय तक टिकें।
जनता को पारदर्शिता चाहिए।
जनता को जवाबदेही चाहिए।
जनता को अपने पैसे का सही उपयोग चाहिए।
क्योंकि सरकारी पैसा वास्तव में जनता का पैसा है।
UBDP का सवाल:
नई सड़क बनने के बाद उसे बार-बार क्यों खोदा जाता है? और भारत में बेहतर योजना, जवाबदेही और दीर्घकालिक बुनियादी ढांचा प्रबंधन कैसे सुनिश्चित किया जा सकता है?
यूनाइटेड भारत डेवलपमेंट पार्टी (UBDP)
आज विकास • कल समृद्धि
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